February 20, 2009
गंगा बहती हो क्यों...
मेरे पास एक ई-मेल आया है...न्यू सेवेन वंडर्स वालों का...जब भी ये संगठन कोई प्रतियोगिता कराता है...इसकी प्रवक्ता टिया मुझे ई-मेल करती है...फिलहाल ये संगठन न्यू सेवेन वंडर्स ऑफ नेचर प्रतियोगिता करा रहा है...गुरुवार यानी 19 फरवरी को टिया वियरिंग ने एक ई-मेल भेजा...मेल पढ़ा तो चौंका...वजह ये कि इस प्रतियोगिता से अपने देश और इसकी सभ्यता की गवाह रही गंगा नदी बाहर होने की कगार पर है...गौरतलब है कि न्यू सेवेन वंडर्स में ताजमहल ने जगह बनाई थी, लेकिन भारत की ही गंगा अगर सेवेन वंडर्स ऑफ नेचर से बाहर हो जाए तो अचरज तो होगा ही...ताजमहल को भारतीयों और यहां तक कि एन.आर.आई. ने खूब वोट दिए थे और टॉप सेवेन वंडर्स में शामिल करा दिया था...ई-मेल पढ़ने पर मुझे पता चला कि गंगा फिलहाल टॉप 77 वंडर्स के नॉमिनेशन में शामिल है और अपने ग्रुप में उसने नियाग्रा प्रपात को भी पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर रखा है...तो आप सोच रहे होंगे कि आखिर गंगा कैसे प्रतियोगिता से बाहर हो सकती है...वजह ये है कि इसे ऑफिशियल सपोर्ट नहीं मिला हुआ है...इस सपोर्ट के बगैर कोई भी एंट्री बाहर हो जाती है...भले ही उसे कितने ही वोट क्यों न मिल रहे हों...तो क्या सरकार इस पर गौर कर रही है...गंगा की हालत वैसे तो किसी से छिपी नहीं है...कई शहरों में इसे नदी की जगह गंदे नाले का रूप मिला हुआ है...सरकार इस ओर भी ध्यान नहीं देती...ऐसे में अगर सेवेन वंडर्स में टॉप पर चल रही गंगा की ओर उसका ध्यान नहीं गया है तो इस पर क्या कहा जा सकता है...
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