कैसे कहते हो कि मैं ज़िन्दा नहीं हूं...
मैं सांस लेता हूं...
मैं अपनी पलकों को बंद करता हूं और खोलता हूं बार-बार...
मैं भूखे पेट नहीं रह सकता...
तो क्यों कहा जाता है कि मैं चलती-फिरती लाश हूं...
इसलिए, क्योंकि मैं कर लेता हूं अपने कान बंद...
आंखों को ढंक लेता हूं अपनी हथेलियों से...
और मुंह बंद रखने में समझता हूं अपनी भलाई...
जब भी होता है कहीं किसी के साथ गलत...

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