February 10, 2009

पत्ता

पत्ता गिरा पेड़ से
और बह चला पानी में
कड़कड़ाती ठंड थी
गुनगुनी धूप सेंक रहा था एक आदमी
उसने देखा बहते पत्ते को कांपते
आदमी ने उठाया और पोंछा अपने जिस्म से पत्ते को
रख दिया उसे गुनगुनी धूप में
पत्ते ने कहा- इन्सानियत अभी जिंदा है...

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