पत्ता गिरा पेड़ से
और बह चला पानी में
कड़कड़ाती ठंड थी
गुनगुनी धूप सेंक रहा था एक आदमी
उसने देखा बहते पत्ते को कांपते
आदमी ने उठाया और पोंछा अपने जिस्म से पत्ते को
रख दिया उसे गुनगुनी धूप में
पत्ते ने कहा- इन्सानियत अभी जिंदा है...
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