अपने पोस्ट खबर की खिचड़ी ऐसे पकाएं में मैंने डेस्क के साथियों को बताया था कि टीवी की किसी खबर को विजुअली कैसे अच्छा बना सकते हैं....इस किस्त में बात करेंगे न्यूज़ सेंस की...क्योंकि बिना न्यूज़ सेंस के खबर को किस एंगल से चलाना है, ये तय नहीं किया जा सकता...
न्यूज़ सेंस या खबर को पकड़ने का एंगल कोई किसी को सिखा नहीं सकता...इसे डेवलप करना पड़ता है...न्यूज़ सेंस डेवलप करने के लिए कम से कम दो अखबार पढ़ने चाहिए और एक ही खबर को दोनों ने किस तरह लिखा है, इस पर ध्यान देना चाहिए...मेरे हिसाब से डेस्क पर काम करने के इच्छुक नए लोगों को इंडियन एक्सप्रेस और अमर उजाला पढ़ना चाहिए...इंडियन एक्सप्रेस की कई खबरें मूल खबर के अंदर से निकालकर बनाई जाती हैं...इसी तरह अमर उजाला में बड़ी स्टोरीज की कई साइड स्टोरीज देने का चलन है...इनके अलावा कोलकाता से प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ भी इस काम में मदद कर सकता है...डेस्क के साथियों को ये सलाह भी दे रहा हूं कि वे अखबार पढ़ें तो हर पन्ने को और यहां तक कि कॉलम्स को भी पढ़ें...इससे ज्ञान भी बढ़ता है और न्यूज़ सेंस भी डेवलप होता है...इनके अलावा इंटरनेट तो है ही...खुद को नेट सैवी बनाना भी आज मीडिया की दुनिया में चमकने के लिए जरूरी है...तो ये थी खबर की खिचड़ी पकाने की दूसरी किस्त...सिलसिला चलता रहेगा...
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